🕉️🛕🚩 *आज का पञ्चाङ्ग* 🚩🛕🕉️
♈ *दिनांक - 17 अप्रैल 2026*
♉ *दिन - शुक्रवार*
♊ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
♋ *शक संवत -1948*
♌ *अयन - उत्तरायण*
♍ *ऋतु - वसंत ॠतु*
♎ *मास - वैशाख (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार चैत्र)*
♏ *पक्ष - कृष्ण*
♐ *तिथि - अमावस्या शाम 05:21 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
♑ *नक्षत्र - रेवती मध्याह्न 12:02 तक तत्पश्चात अश्विनी*
♒ *योग - वैधृति प्रातः 07:22 तक तत्पश्चात विष्कंभ*
♓*राहुकाल - दिन 10:30 से दोपहर 12:06 तक*
🌞 *सूर्योदय -05:41*
🌚 *सूर्यास्त - 18:31*
❌*दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे*
🛕 *व्रत पर्व विवरण- दर्श अमावस्या, वैशाख अमावस्या, पंचक,(समाप्त: दोपहर 12:02 )*
💥 *विशेष - अमावस्या एवः व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
*🚩🛕 वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि प्रदोषव्यापिनी (संध्याकाल) या रात्रि के प्रथम प्रहर में हो तभी परशुराम जयंती मनाई जाती है पुरुषार्थ चिंतामणि के अनुसार प्रदोषव्यापिनी ग्राह्य है जबकि धर्मसिंधु के अनुसार रात्रि के प्रथम प्रहर में व्याप्त तिथि में परशुराम जयंती स्वीकार्य है । इस प्रकार अप्रैल दिन रविवार को परशुराम जयंती है*
🛕 *अक्षय फलदायी “अक्षय तृतीया”*
➡ *निर्णयसिंधु के अनुसार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्वाह्न व्यापिनी तृतीया को अक्षय तृतीया होती है , दोनों दिन व्याप्ति की स्थिति में दूसरे दिन मनाई जाती है जबकि दोनों दिन अव्याप्ति को स्थिति में प्रथम दिन मनाई जाती है , इस नियम से अप्रैल 2026 सोमवार को अक्षय तृतीया है ।*
🚩 *वैशाख शुक्ल तृतीया की महिमा मत्स्य, स्कंद, भविष्य, नारद पुराणों व महाभारत आदि ग्रंथो में है । इस दिन किये गये पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो) व अनंत फलदायी होते हैं, अत: इसे 'अक्षय तृतीया' कहते है । यह सर्व सौभाग्यप्रद है ।*
🚩 *यह युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेतायुग की प्रारम्भ तिथि है । श्रीविष्णु का नर-नारायण, हयग्रीव और परशुरामजी के रूप में अवतरण व महाभारत युद्ध का अंत इसी तिथि को हुआ था ।*
👉🏻 *इस दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है । जैसे - विवाह, गृह - प्रवेश या वस्त्र -आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है ।*
🛕 *प्रात:स्नान, पूजन, हवन का महत्त्व*
🚩 *इस दिन गंगा-स्नान करने से सारे तीर्थ करने का फल मिलता है । गंगाजी का सुमिरन एवं जल में आवाहन करके ब्राम्हमुहूर्त में पुण्यस्नान तो सभी कर सकते है । स्नान के पश्चात् प्रार्थना करें :*
🌷 *माधवे मेषगे भानौं मुरारे मधुसुदन ।*
*प्रात: स्नानेन में नाथ फलद: पापहा भव ॥*
🛕 *'हे मुरारे ! हे मधुसुदन ! वैशाख मास में मेष के सूर्य में हे नाथ ! इस प्रात: स्नान से मुझे फल देनेवाले हो जाओ और पापों का नाश करों ।'*
👉🏻 *सप्तधान्य उबटन व गोझरण मिश्रित जल से स्नान पुण्यदायी है । पुष्प, धूप-दीप, चंदनम अक्षत (साबुत चावल) आदि से लक्ष्मी-नारायण का पूजन व अक्षत से हवन अक्षय फलदायी है ।*
🌷 *जप, उपवास व दान का महत्त्व*
🛕 *इस दिन किया गया उपवास, जप, ध्यान, स्वाध्याय भी अक्षय फलदायी होता है । एक बार हल्का भोजन करके भी उपवास कर सकते है । 'भविष्य पुराण' में आता है कि इस दिन दिया गया दान अक्षय हो जाता है । इस दिन पानी के घड़े, पंखे, (खांड के लड्डू), पादत्राण (जूते-चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान पुण्यदायी है । परंतु दान सुपात्र को ही देना चाहिए ।*
🌷 *पितृ-तर्पण का महत्त्व व विधि*
🚩 *इस दिन पितृ-तर्पण करना अक्षय फलदायी है । पितरों के तृप्त होने पर घर में सुख-शांति-समृद्धि व दिव्य संताने आती है ।*
💥 *विधि : इस दिन तिल एवं अक्षत लेकर र्विष्णु एवं ब्रम्हाजी को तत्त्वरूप से पधारने की प्रार्थना करें । फिर पूर्वजों का मानसिक आवाहन कर उनके चरणों में तिल, अक्षत व जल अर्पित करने की भावना करते हुए धीरे से सामग्री किसी पात्र में छोड़ दें तथा भगवान दत्तात्रेय, ब्रम्हाजी व विष्णुजी से पूर्वजों की सदगति हेतु प्रार्थना करें ।*
🛕*आशीर्वाद पाने का दिन*
🚩 *इस दिन माता-पिता, गुरुजनों की सेवा कर उनकी विशेष प्रसन्नता, संतुष्टि व आशीर्वाद प्राप्त करें । इसका फल भी अक्षय होता है ।*
🛕 *अक्षय तृतीया का तात्त्विक संदेश*
🚩 *'अक्षय' यानी जिसका कभी नाश न हो । शरीर एवं संसार की समस्त वस्तुएँ नाशवान है, अविनाशी तो केवल परमात्मा ही है । यह दिन हमें आत्म विवेचन की प्रेरणा देता है । अक्षय आत्मतत्त्व पर दृष्टी रखने का दृष्टिकोण देता है । महापुरुषों व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा और परमात्म प्राप्ति का हमारा संकल्प अटूट व अक्षय हो - यही अक्षय तृतीया का संदेश मान सकते हो ।*
🕉️🛕🚩 *डॉ० बिपिन पाण्डेय, ज्योतिषाचार्य, ज्योतिर्विज्ञान विभाग, लख़नऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ📱8756444444* 🚩🛕🕉️
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Learn Moreमिस्टिक पावर राष्ट्र जागरण और सांस्कृतिक चेतना के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता हैं।
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