गाय का दूध पीना गाय के प्रति क्रूरता है!

img25
  • मिस्टिक ज्ञान
  • |
  • 31 October 2024
  • |
  • 0 Comments

डॉ. दिलीप कुमार नाथाणी (विद्यावाचस्पति)- Mystic Power- वादे वादे तत्त्व जायते बारम्बार चर्चा करने से तत्त्व निकल कर आता है जिस प्रकार दधि (दही) को मंथने से उसमें से मक्खन निकल कर आता है उसी प्रकार वाद—विवाद करने से तथ्यपूर्ण ज्ञान निकल कर आता है। मेरी वृत्ति भी कुछ ऐसी ही है धर्म के नाम पर विवेकहीन होकर सभी से चर्चा कर लेता हूँ तथा अन्त में मुँह की खानी पड़ती है ता खा लेता हूँ पर जिस प्रकार गोबर गिरे तो जब उठाओ तो वह मिट्टी को तो साथ में लेकर ही आएगा वैसे ही मैं भी गाय के गोबर की भाँति गोबर गणेश कहीं का कुछ न कुछ उठा कर ही लाता हूँ तो इस बार यह ज्ञान प्राप्त हुआ कि ''गाय का दूध पीना गाय के प्रति क्रूरता है'' जब यह ज्ञान प्राप्त हुआ तो मैं क्षणभर अवाक् रह गया मुझ सनातन हिन्दू धर्मावलम्बि गोबर गणेश को यह ज्ञान दिया गया कि — *''मनुष्य के अलावा कोई पशु किसी अन्य का दूध नहीं पीता अत: गाय का दूध पीना गाय के प्रति क्रूरता है'' बस इस पंक्ति को सुनते ही मेरे शक्त्पिात हो गया सभी चक्र एक ही साथ खुल गये। अब यह जानने योग्य तथ्य है कि यह बात कह कौन रहा है तो आप सभी पाठक समझ ही गये होंगे कि गाय के दूध पीना गाय की प्रति क्रूरता है यह बात वे लोग कह रहे हैं जिन्हें गाय खानी है तथा जो नित्य गाय खाते हैं। और तो और एक मांस भोजी बड़ी ही निर्लजता (बेशर्मी) के साथ अपनी मां का दूध पीने की अपेक्षा वृश्चिकयोनि के बच्चों की भाँति अपनी ही मां के माँस को खाना पसन्द करता है। आप सभी जानते हैं मादा वृश्चिक (मादा बिच्छु) अपने बच्चों को अपनी ही पीठ पर लेकर चलती है तथा वे बच्चे अपनी ही माँ का माँस खाते हैं य​दि माता वृश्चिक की पीठ से कोई बच्चा नीचे गिर जाता है तो माँ अपने ही बच्चे को खा लेती है जो बच्चे अपनी माँ की पीठ पर से नहीं गिरते वे अपनी ही माँ का दूध नहीं पीते अपितु माँ का माँस खाते हैं। तो गाय को दूध पीना गाय के प्रति क्रूरता है उसका तात्पर्य है यह बात कहने वाले सभी अपनी माँ का दूध नहीं वरन् अपनी ही माँ का माँस खाना में अधिक रुचि रखते हैं वैसे फ्रायड के योनकुण्ठित वासना भरे घृणित सिद्धान्तों से तो हम सभी परिचित हैं यहभी उसी कैटेगरी से आया हुआ सिद्धान्त है। अब आता है कि इस वाक्य से हमें क्या क्या ज्ञान हुआ—  

  1. भारत में जिन जिन हिन्दूओं ने ऐसी शिक्षा प्राप्त कर ली है वे नाममात्र के हिन्दू है वस्तुत: वे विश्व की एक मात्र सनातन मानवता वाली संस्कृति को नष्ट करने वाली आसुरी संस्कृति से दीक्षित हो चुके हैं।
  2. हमें अपने बच्चों को ऐसे विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में नहीं भेजना चाहिये जहाँ उन्हें केरियर के नाम पर असुर बनाया जाय।
  3. हमें किसी अन्य से नहीं आने वाले समय में अपनी ही पीढ़ियों से लड़ना पड़ेगा यह प्रक्रिया प्रारम्भ हो चुकी है मैं लड़ रहा हूँ।
  4. इन सभी कनवर्टेड हिन्दू नामधारियों को सर्वाधिक घृणा, ईर्ष्या एवं वैमनस्य हिन्दूओं से ही है।
  5. इन कनवर्टेड का वश चले तो ये सभी मन्दिरों को तोड़ दें तथा सभी हिन्दू स्त्रियेां को स्वयं ही अपमानित कर दें।
  6. इन्हें भूतकाल में हिन्दूओं पर हुये अत्याचारों से कोई लेना देना नहीं।
  7. ये कश्मीर में धारा 370 के पक्ष में हैं।
शेष सभी बिन्दुओं को आप स्वयं समझ सकते हैं। नोट:— गाय खाने वाले पापी ही गाय के दूध को पीना क्रूरता कहते हैं। अर्थात् ये वृश्चिक योनि की भाँति अपनी माता का माँस खाने वाले हैं।    



Related Posts

img
  • मिस्टिक ज्ञान
  • |
  • 18 August 2026
सृष्टि तत्व के 7 महर्षि का रहस्य

0 Comments

Comments are not available.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Post Comment