आरम्भ में एक ही प्रकार का ऋषि था जिसे एकर्षि कहते थे।...
कुछ आधुनिक और अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त बुद्धिजीवी कहते हैं कि ये सारे दर्शन तो आध्यात्मिक हैं —...
गुरु और शिष्य के बीच "एकात्म-बोध" का अनुभव कैसे होगा? ...
इन्द्र ने कार्त्तिकेय से कहा कि वह ब्रह्मा से सलाह कर वर्ष आरम्भ का पुनः निर्धारण करें।...
ध्वज प्रगति और गति का प्रतीक होता है। वह ऊँचाई पर होता है और दूर से दिखाई देता है। उसी...
नारद पुराण में भी सत्य, त्रेता, द्वापर एवं कलियुग की क्रमश: कार्तिक शुक्ल नवमी, वैशाख शुक्ल तृतीया, माघी अमावस्या एवं...
भारत में भी व्यक्तिवादी सम्प्रदायों ने सनातन की निन्दा की है, पर उसी ज्ञान को थोड़े शब्द बदल कर अपना...
असुरों ने भी समय समय पर अपने स्वार्थ या वासना पूर्ति के लिए वेद शब्दों के भिन्न अर्थ किये, जैसे...
सनातन धर्म में नास्तिक उसे कहते हैं जो कहता है, न अन्यत् अस्ति = जो मैं कहता हूं वही सही...
कालपुरुष व्यापक है, आदि है और यज्ञ पुरुष सादि है, सीमित है।...