भगवान शिव का स्वरूप अत्यंत अलौकिक और रहस्यमय है। वे विभिन्न वस्त्र, आभूषण और प्रतीक धारण करते हैं, जो उनके...
बिना पुरश्चरण किये हम गुरू-कृपा द्वारा प्राप्त मन्त्र से भी कोई कार्य नहीं ले सकते। अतः पुरश्चरण ही मन्त्र का...
इसका तात्पर्य यह मानते हैं कि कार्यक्रम पूर्ण हुआ। पर इसका यह अर्थ नहीं है।...
दीक्षा सम्प्रदाय में होती है,धर्म में नहीं । क्योंकि जो धर्म में नहीं है वह अधर्म में है ।...
उसी की सत्ता से सभी सत्तावान् हैं, प्रतिष्ठित हैं, चेतन हैं और आनन्दरूप हैं। वही एक तत्त्व विभिन्न रूपवाला होकर...
कुलदेवी, ग्रामदेवी, शक्तिपीठ आदि रूपों में देवी के विविध सगुण रूपों की उपासना की जाती है । हिन्दू संस्कृति में...
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही क्यों? इसका प्रथम उद्गाता वेद है । वेद अति प्राचीन वांग्मय है। इसके बारे में दो...