देवता सर्वव्यापी हैं,मूर्ति में भी हैं और अमूर्त भी हैं । किन्तु विशिष्ट अनुष्ठानों में विशिष्ट विग्रहों में स्थित होकर...
सूर्य केन्द्रित चक्रों के रूप में ३ चक्र सौर मण्डल के भीतर हैं, जो विष्णु के ३ पद हैं। प्रथम...
जो किसी प्रकार के अञ्जन से नहीं दीखे या अनुभव किया जा सके वह निरञ्जन तत्त्व है। यह अति सूक्ष्म,...
परिवार तथा गोत्र से काटना ही कन्या दान है और इसका अधिकार उसके माता पिता को ही है। उसके बाद...
गायत्री २४ अक्षर का छन्द है। २ घात २४ = १ कोटि) सभी लोकों की माप है। विष्णु पुराण (२/७/४)...
नागराज वासुकि को मन्दराचल घुमाने की रस्सी कहा गया है। वह देव-असुरों के सहयोग के मुख्य संचालक थे। असुर वासुकि...
हमारे मन में शंका होती है कि दो ही विद्या कैसे जानने लायक है ?...
आध्यात्मिक शोध द्वारा यह भी स्पष्ट हुआ है कि अमावस्या और पूर्णिमा के दिन मनुष्य पर होने वाले प्रभाव में...
किसी भी कुंभ पर्व के कुछ दिन पूर्व परंपरा के अनुसार विभिन्न अखाडों के साधु-संतों की ओर से कुंभ क्षेत्र...
आज हमें भी यदि जीवन को महान् बनाना हैं।यदि जीवन को साधनामय बनाना है।...