शाक्त तन्त्रों या निगम ग्रन्यों के विषय काफी व्यापक हैं। इनमें राजधर्म, युगधर्म, वर्ण-व्यवस्था, जातिभेद, सर्ग, उपसर्ग, सृष्टि, प्रलय इत्यादि...
हमारी मान्यता है कि 'ये यन्त्र आज के व्यस्त जीवन में अनेक समस्याओं से धिरे हुए मानव के लिए एक...
मुण्डक उपनिषद् (१/१/१-५) के अनुसार देवताओं में प्रथम ब्रह्मा ने अपने ज्येष्ठ पुत्र अथर्वा को सभी विद्याओं का आधार ब्रह्मविद्या...
ऊर्जा को "शक्ति"नाम दिया गया। चूंकी ये अग्नितत्व है; ये निकलता है भू-गर्भ से। उसे शांत करनेके लिये शिवलिंग पर...
तान्त्रिक आचार्यगण जिसे परमसत्ता कहते है, बही निष्कलपरमपद है। उसी को परमशिव कहा जाता है...
प्रत्येक महाविद्या की क्रिया के मूलभाव- बीजा-क्षरनाद (मूलबीज) में योगियों, सिद्धों ने प्रत्येक महाविद्या के बीज संयुक्त किए हैं। उस...
ब्रह्मा में सृष्टि-शक्ति, विष्णु में पालनशक्ति तथा महेश में संहारशक्ति निहित है। इसी प्रकार सूर्य में प्रकाश-शक्ति, अग्नि में तेजशक्ति, जल में शैत्य...
दक्षिणामूति का बाश्रयण करने से इसे दक्षिणाचार कहा गया है। यह आचार वीरभाव और दिव्यभाव सम्पन्न साधकों के लिए प्रवर्तित...
वैदिक विधि से संकल्पपूर्वक देवार्चन करना, मद्य-मांस का सेवन न करना, ब्रह्मचर्य पालन करना, लोभ-मोह से दूर रहना, एकान्त, शान्त...
तन्त्र में भाव बहुत ही गुरुत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्द है। कौलावली तन्त्र के ग्यारहवें उल्लास में बताया गया है कि 'भावपदार्थ'...