लोकसगीत का जन्म व्यक्ति के नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्सव- त्योहारों, रीति-रिवाजों एवं सामूहिक कार्यों द्वारा ही हुआ है। व्यक्ति के...
मानव शरीर की रचना स्वयं यन्त्रमय है। इसके अंग-प्रत्यंगों का सूक्ष्म रूप से अध्ययन करने पर त्रिकोण, चतुष्कोण आदि बने...
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जय श्रीराम, यानि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम हृदय में दर्शन दें। - बार बार प्राणायाम के साथ इसका मानसिक उच्चारण...