भारत में भी व्यक्तिवादी सम्प्रदायों ने सनातन की निन्दा की है, पर उसी ज्ञान को थोड़े शब्द बदल कर अपना...
असुरों ने भी समय समय पर अपने स्वार्थ या वासना पूर्ति के लिए वेद शब्दों के भिन्न अर्थ किये, जैसे...
सनातन धर्म में नास्तिक उसे कहते हैं जो कहता है, न अन्यत् अस्ति = जो मैं कहता हूं वही सही...
संस्कृत में ‘ग्रह’ का अर्थ है—“गृहीतुम् शक्तः” अर्थात—जो जीव के कर्मफल को ग्रहण कर के उसे भोग के रूप में...
कालपुरुष व्यापक है, आदि है और यज्ञ पुरुष सादि है, सीमित है।...
श्रीरामजी के द्वारपर श्रीहनुमान्जी सतत विराजमान रहते हैं और बिना उनकी आज्ञा के कोई रामजी की ड्योढ़ी में प्रवेश नहीं...
वराह ने समुद्र पार कर हिरण्याक्ष को मारा। जेन्द अवेस्ता के अनुसार हिरण्याक्ष का राज्य आमेजन नदी के क्षेत्र (दक्षिण...
श्रीरामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।...
केन्द्र–त्रिकोण का सिद्धान्त ज्योतिषशास्त्र का ऐसा आधार है जिस पर समस्त योग-सिद्धान्त, राजयोग, लक्ष्मीनारायण योग, धर्म–कर्माधिपति योग तथा अनेक चर-स्थावर,...
गीता में पहले महर्षियों तथा मनु आदि से सृष्टि का आरम्भ कहा है तथा विभिन्न प्रकार की सृष्टियों में सर्वश्रेष्ठ...