परब्रह्म हमारी कल्पना से परे है, अतः उसे ३ विभागों में वर्णन करते हैं। हर प्रकार से विभाजन करने पर...
व्यक्ति, समाज या राष्ट्र के अंगों का आन्तरिक समन्वय १७ प्रकार से है जो दीखता नहीं है। वह कृष्ण गति...
गर्भशुद्धिकारक हवन, जातकर्म, चूडाकरण तथा मौञ्जीबन्धन (उपनयन) आदि संस्कारों के द्वारा द्विजों के बीज तथा गर्भसम्बन्धी दोष- पाप नष्ट हो जाते हैं।...
भगवान सूर्यदेवजी ब्रह्माजी, भगवान विष्णु और शिवजी का साकार संयुक्त स्वरूप होने के कारण परब्रह्म का आसानी से बोधगम्य साकार रूप...
बौद्ध धर्म के प्रचारक प्रमुख ब्राह्मण बौद्ध विद्वान...
ब्रह्मा में सृष्टि-शक्ति, विष्णु में पालनशक्ति तथा महेश में संहारशक्ति निहित है। इसी प्रकार सूर्य में प्रकाश-शक्ति, अग्नि में तेजशक्ति, जल में शैत्य...
वेदान्त-दर्शन में कहा गया है कि देवता एक ही समय अनेक स्थानों में भिन्न-भिन्न रूप से प्रकट होकर अपनी...
बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में जिन अनेक वर्गों ने भूमिका निभाई, उनमें ब्राह्मणों का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा।...
यह विषय हम सीधे-सीधे कुण्डलिनी साधना से जोड़ रहे है। जो भी व्यक्ति साधनाओं में रूचि रखते हैं। वो आज्ञा...
उषा की लाली से पूर्व ही स्नान करना उत्तम है। इससे प्राजापत्य व्रत का फल प्राप्त होता है। तेल लगाकर...