पंचम भाव को संतान-भाव कहा गया है। यह पूर्वजन्म के पुण्य, विद्या, बुद्धि, मंत्र-जप, रचनात्मकता तथा प्रेम से भी संबंधित...
‘प्रत्येक जीव में शिवत्व (आत्मतत्त्व) विद्यमान है और वह चैतन्यरूप है—वही परम शिव है।...
‘वैलेंटाइन डे’ के नाम पर युवा पीढ़ी को व्यसनाधीनता और अनैतिकता के गर्त में ढकेला जा रहा है।...
शाक्त तन्त्रों या निगम ग्रन्यों के विषय काफी व्यापक हैं। इनमें राजधर्म, युगधर्म, वर्ण-व्यवस्था, जातिभेद, सर्ग, उपसर्ग, सृष्टि, प्रलय इत्यादि...
पञ्चाक्षरमन्त्र (नमः शिवाय) से पहले ॐकार जोड़ देने से यह षडक्षर मन्त्र कहलाने लगता है। यह षडक्षर होते हुए भी...
दूसरे शब्दों में कहा जाय तो 'अ' आदिम अक्षर है। अन्य सत्र अक्षरों में 'अ' है।...
दत्त परमात्मा अपनी योगमाया से सोलह अंशों से बने (उन्नीस इंद्रियाँ और पंचमहाभूत) विराट पुरुषरूप विश्व की रचना करते हैं।...
हमारी मान्यता है कि 'ये यन्त्र आज के व्यस्त जीवन में अनेक समस्याओं से धिरे हुए मानव के लिए एक...
जिस नक्षत्र में विवाह होता है, उसी के अनुरूप दैव-फल दाम्पत्य जीवन में प्रकट होता है।...
भौगोलिक रूप में भारत का मस्तिष्क स्थान हिमालय का त्रिविष्टप् (तिब्बत) है। इसके ३ विष्टप् (या विटप = वृक्ष) हैं।...