तान्त्रिक आचार्यगण जिसे परमसत्ता कहते है, बही निष्कलपरमपद है। उसी को परमशिव कहा जाता है...
प्रत्येक महाविद्या की क्रिया के मूलभाव- बीजा-क्षरनाद (मूलबीज) में योगियों, सिद्धों ने प्रत्येक महाविद्या के बीज संयुक्त किए हैं। उस...
हमारे देश में जहां धर्माचरण, साधना एवं गुरु की कृपा को भुलाया जा रहा है, वहीं समाज को मार्गदर्शन देने...
समस्त प्राणियों की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय का कारण प्राणवायु नहीं हो सकता। अतः यहाँ 'प्राण' नाम से ब्रह्म का...
शिवालय के प्रत्येक मंदिर में नन्दी के दर्शन सर्वप्रथम होते है! यह शिव का वाहन है! यह सामान्य बैल नहीं...
भारत का हृदय स्थान पुरी है, जो ९ खण्डों के भारतवर्ष का उत्तर-दक्षिण और पूर्व पश्चिम दिशा में केन्द्र भाग...
विष्णु यज्ञ रूप हैं, अतः असुरों द्वारा यज्ञ में बाधा होने पर विष्णु के पास गये, जिनके जाग्रत रूप जगन्नाथ...
सनातन संस्था की ओर से 1 व्यक्ति को ‘हिंदू राष्ट्ररत्न’ और 5 व्यक्तियों को ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार देकर गौरव प्रदान किया गया...
प्रतिष्ठा में जहां एक कुण्ड का विधान वहाँ ईशान, पूर्व, पश्चिम, सत्तर आदि का कण्ड आचार्य कुण्ड होता है। प्रतिष्ठा...
प्रातःसंध्या का तो समस्त कार्य पूर्वाभिमुख होकर ही करना चाहिये। परंतु मध्याह्न-संध्या और सायं-संध्या में अर्घ्य, उपस्थान और जप- सूर्य...